बुधवार, 29 अप्रैल 2015

COMPUTER KI SAMANAYA SAMASYAYEN

मित्रो मैं आज आप लोगो को बताने जा रहा हूँ कम्प्युटर की कुछ सामान्य बीमारियों के बारे में :-

Image result for RAM1-  डिस्प्ले मे कुछ ना आना – मित्रो यह कम्प्युटर मे एक सामान्य बीमारी है जो कम्प्युटर में धूल वागेरा आ जाने पर होता है इसका एक सामान्य उपाय है की कम्प्युटर मे लगे रैम को सफाई करके दोबारा लगा देने पर यह समस्या ठीक हो जाती है लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूँ की यदि आप कम्प्युटर को खोलते हैं तो उसे सही तरीके से सफाई करके वापस कम्प्युटर को सही तरीके से लगा देवे फिर देखे आपका कम्प्युटर सही तरीके स्टार्ट हो जाएगा|
Image result for CPU POWER SW
2-  पावर ऑन होने मे समस्या – मान लिया जाए की आपको कम्प्युटर मे कोई जरूरी कार्य करना है और आपके कम्प्युटर के चालू करने का बटन खराब हो जाए आएसे मे आपको कही दूर जाने की आवाक्यता नहीं है आप अपने कम्प्युटर को खोलिए और मदर बोर्ड के नीचे एक वाइर लगा होगा जिसमे power sw लिखा होगा उसे निकाल ले व यदि आपको कम्प्युटर खुला रखके चलानी है तो किसी वाइर या किसी पेचकस से उसे शॉट कर दे आपका कम्प्युटर चालू हो जाएगा या फिर आप reset sw को निकाल कर power sw की जगह लगा सकते है फिर आप जब अपना कम्प्युटर चालू करना चाहे तो रिस्टार्ट बटन का प्रयोग करके आपका कम्प्युटर चालू कर सकते हैं|
3-  आपके हार्डडिस्क को बूट ना करना – कई मित्रो ने मुझे बताया की मेरा हार्डडिस्क बूट नहीं ले रहा एसका एक उपाय यह भी है की आप अपने कम्प्युटर के मदरबोर्ड से लगे हार्डडिस्क के वाइर को उसके लगे स्थान से दूसरे स्थान पर लगा कर भी सॉल्व कर सकते है या तो उसका वाइर खराब हो गया है तो मार्केट से नया sata या pata वाइर लाकर चेंज कर सकते हैं|
4-  सीडी ड्राइव मे आने वाली समस्या – कई बार ये होता है की आपको कोई जरुजी विडियो देखना है और आपका सीडी ड्राइव न दिखाये इसका एक सुद्ध उपाय यह है की आपके ड्राइव मे लगे वाइर को निकाल कर एक बार सही ढंग से लगा लेवे |

5-  आपके पेनड्राइव आदि को कम्प्युटर मे न ढिखाना – कई बार ये होता है की आपका एक्सटर्नल ड्राइव को कम्प्युटर नहीं दिखा पता है इसका एक उपाय यह भी है की आप अपने कम्प्युटर डेस्कटॉप मे माइ कम्प्युटर मे राइट क्लिक करके डिवाइस मैनेजर मे जाकर जो डिवाइस नहीं दिखा रहा है उसपे क्लिक करके अपडेट ड्राइव करके सर्च ऑटोमैटिक पर क्लिक कर देवे आपका कम्प्युटर स्वत: ही आपके ड्राइव का ड्राईवर लेकर सुचारु रूप से आपके ड्राइव को चलाने लगेगा|

मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

WEBSITE DOMAIN

प्रचलित डोमेन एवं उनसे जुड़े क्षेत्र

  • .edu – पढाई वाली संस्थानों से जुड़े साइट्स के लिए
  • .net – नेटवर्क संस्थानों से जुड़े साइट्स के लिए
  • .int- अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों से जुड़े साइट्स के लिए
  • .org- एसी संस्थानों से जुड़े साइट्स के लिए जो पैसे के लिए काम नहीं करते
  • .mil- सैन्य संस्थानों से जुड़े साइट्स के लिए
  • .jobs- नौकरी देने वाले संस्थानों से जुड़े साइट्स के लिए
  • .gov- सरकारी संस्थानों से जुड़े साइट्स के लिए
  • .com- व्यपारिक संस्थानों से जुड़े साइट्स के लिए
  • .name- एक व्यक्ति विशेष के लिए
  • .pro- एक प्रोफेशनल जैसे – डॉक्टर, प्रोफेसर वकील आदि के लिए
  • .in- भारतीय साइट्स के लिए
  • .uk- लन्दन के साइट्स के लिए एवम अन्य

HOW TO START MOBILE INTERNET

मोबाईल पर इन्टरनेट प्रारम्भ करना

सबसे पहले यह सुनिश्चित कर लेना होता हैं कि जिस मोबाईल में इन्टरनेट चलाना हैं उसमें GPRS की  सुविधा हैं या नहीं. जब यह पता चल जाता हैं कि हाँ मोबाईल में यह सुविधा हैं तो जिस कम्पनी का सीम कार्ड लगा हैं उस कम्पनी के ग्राहक सेवा केन्द्र को फोन कर के GPRS प्रारम्भ करने का आग्रह करना पड़ता हैं. शुरुवाती जाँच के बाद जब ग्राहक सेवा केन्द्र आपके आग्रह को मान लेता हैं तो आपके मोबाईल पर एक सन्देश प्राप्त होगा. यह एक सिस्टम सन्देश होता हैं जिसमे इन्टरनेट सेटिंग्स समाहित होती हैं. इस सन्देश को खोल कर इसे मोबाईल में सेव करना होता हैं. इसके सेव होने के बाद ही मोबाईल में इन्टरनेट प्रारम्भ की जा सकती हैं. हरएक मोबाईल कम्पनी की अपनी अपनी GPRS की शर्ते होती हैं जिसे ग्राहक सेवा केन्द्र के मार्फ़त से जान सकते हैं.
स्टेप एक – GPRS सपोर्ट करने वाला मोबाईल खरीदना.
स्टेप दो – GPRS सेवा देने वाला सीम कार्ड लेना.
स्टेप तीन – सीम एक्टीवेट होने के बाद ग्राहक सेवा केन्द्र को GPRS सुविधा के लिए आग्रह करना.
स्टेप चार – ग्राहक सेवा केन्द्र से आया सन्देश (GPRS सेटिंग्स) को मोबाईल में सेव करना.
स्टेप पांच – मोबाईल रिस्टार्ट करके मोबाइल इन्टरनेट ब्रोज़र खोल कर इन्टरनेट उपयोग कर सकते हैं.

HOW TO UPGRADE WINDOWS 7

विंडो 7 डालने की जानकारी


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विंडो 7 डालने से पहले आपके पास विंडो 7 की बूटेबल डीवीडी होनी चाहिए और कंप्यूटर के डइवर की सीडी होना जरूरी है।
अपने कंप्यूटर की डीवीडी ड्राइव मे विंडो 7 की बुटेबल डीवीडी डाल दें। कंप्यूटर को रीस्टार्ट करें और जेसे ही वह स्टार्ट हो जो कीबोर्ड से एफ 10 या डीलीट की दबाएं। इसके बाद बूट आर्डर मेन्यू मे जाकर डीवीडी रोम को सलेक्ट करें। जिससे कंप्यूटर खुलने के बाद सीधे आपके डीवीडी रोम को ही रीड करें
ये सेटिंग करने के बाद अपने सिस्टम को रिस्टार्ट करे सिस्टम ओं होने के बाद आपकी स्क्रीन पर विंडो की लोडिंग फाइल का आइकन आएगा जैसा आप चित्र में देख रहे है
इसके बाद एक और विंडो खुलेगी जिसमे आपको लेंग्वेज और टाइम जोन सेट करना है टाइम सेट करने के बाद नेक्स्ट पर क्लीक कर दे
फिर अगले स्टेप पर इंस्टाल नाव पर क्लीक कर दे
अब A accept पर क्लीक करने के बाद नेक्स्ट पर क्लीक कर दे
अगली विंडो में आपको अब्ग्रेट पर क्लीक करना है
फिर जो अगली विंडो खुलेगी उसमे आपकी हार्ड डिस्क के पार्टीशन शो होंगे जिसमे आपको C ड्राइव पर क्लीक करके नेक्स्ट पर क्लीक करना है
नोट-अगर आप किसी नयी हार्ड डिस्क में विंडो डाल रहे हो तो आप यहाँ अपनी पसंद के हिसाब से ड्राइव के पार्टीशन भी बना सकते हो 
नेक्स्ट पर क्लीक करने के बाद आपके सिस्टम में विंडो की फाइल कॉपी होना सुरु हो जाएगी
फाइल कॉपी होने के बाद आपका कंप्यूटर रिस्टार्ट होगा

2 या 3 मिनट का वेट करने के बाद एक और विंडो खुलेगी जिसमे आपको यूजर नेम पर पासवर्ड डालना होगा
फिर अगले स्टेप में आपको विंडो 7 की प्रोडक्ट की डालनी होगी फिर नेक्स्ट पर क्लीक करे
इसक बाद Ask me later पर क्लीक करे
फिर अगले स्टेप में आपको टाइम जोन में आकर टाइम और डेट सेट करने के बाद नेक्स्ट पर क्लीक करना है
इसके बाद होम नेटवर्क पर क्लीक करने के बाद नेक्स्ट पर क्लीक कर दे
इसके बाद 2 या 3 मिनट का इंतजार करे वेलकम स्क्रीन के बाद आपके सामने विंडो 7 का डेस्कटॉप आ जायेगा आपकी विंडो 7 डल चुकी है
अब आपको अपने मदरबोर्ड की ड्रावर की सीडी से अपने सिस्टम में ड्राइवर डालने होने ड्राइवर डालने के बाद आपका सिस्टम आपके लिए रेडी है
जिनके पास विंडो 7 की बूटेबल डीवीडी नहीं है वो लोग यहाँ क्लीक करके विंडो 7 की बूटेबल डीवीडी डाउनलोड कर सकते है 

SHORT INFO

आज के समय सम्पूर्ण संसार मे शायद ही कोई ऐसा इन्सान बचा होगा जो किसी न किसी रूप से कंप्यूटर या उससे होने वाले कामो से न जुड़ा हो. आज कंप्यूटर ने साक्षरता का परिभाषा ही बदल कर रख दिया है. आज के समय जो कंप्यूटर नहीं जानता उससे निरक्षर कहा जाता हैं.
हम्रारे देश मे लगभग आधी से ज्यादा आबादी हिंदी, लिख बोल और समझ सकती हैं. परन्तु अधिकांश लोगो के मन मे कंप्यूटर को लेके एक धारणा बनी हुई है की कंप्यूटर केवल वही लोग इस्तेमाल कर सकते है जो इंग्लिश जानते है. उनकी यह धारणा पूर्णता गलत भी नहीं है. अगर बस ४-५ वर्ष पहले की बात करे तो उस समय कंप्यूटर पर इंग्लिश का ही बोल-बाला था. हिंदी के उपयोग के लिए अलग से फॉण्ट डाउनलोड करना पड़ता था. इसके वाबजूद भी केवल हिंदी लिखा जा सकता था हिंदी मे कंप्यूटर को निर्देश नहीं दिया जा सकता था. परन्तु आज यह बातें एक मिथ्या बन कर रह गयी हैं. अब हम कंप्यूटर को पूर्णताः हिंदी मे इस्तेमाल कर सकते है. जरूरत हैं तो सिर्फ एक सही मार्गदर्शन की.
हमारे इस ब्लॉग का उद्देश्य उन लोगो तक कंप्यूटर शिक्षा को पहुँचाना है जिन्हें इंग्लिश समझने मे समस्या होती हैं ताकि वो भी तकनीकों का पूरा फ़ायदा उठा पाए. हमने इस ब्लॉग को कंप्यूटर के शुरुवाती अध्याय से प्रारम्भ किया है. आशा है यह ब्लॉग आपको सम्पुर्ण सहयोग प्रदान करेगा.

PC CMPUTERS


पर्सनल कम्प्यूटर माइक्रो कम्प्यूटर समानार्थक से जाने वाले वैसे कम्प्यूटर प्रणाली है जो विशेष रूप से व्यक्तिगत अथवा छोटे समूह के द्वारा प्रयोग मे लाए जाते हैं। इन कम्प्यूटरों को बनाने में माइक्रोप्रोसेसर मुख्य रूप से सहायक होते है । पर्सनल कम्प्यूटर निर्माण विशेष क्षेत्र तथा कार्य को ध्यान में रखकर किया जाता है। उदाहरणार्थ- घरेलू कम्प्यूटर तथा कार्यालय में प्रयोगकिये जाने वाले कम्प्यूटर। बजारमें, छोटे स्तर की कम्पनियों अपने कार्यालयों के कार्य के लिए पर्सनल कम्प्यूटर को प्राथमिकता देते हैं।
पर्सनल कम्प्यूटर के मुख्य कार्यो में क्रीड़ा-खेलना, इन्टरनेट का प्रयोग , शब्द-प्रक्रिया इत्यादि शामिल हैं। पर्सनल कम्प्यूटर के कुछ व्यवसायिक कार्य निम्नलिखित हैं-
1. कम्प्यूटर सहायक रूपरेखा तथा निर्माण
2. इन्वेन्ट्री तथा प्रोडक्शन कन्ट्रोल
3. स्प्रेडशीट कार्य
4. अकाउन्टिंग
5. सॉफ्टवेयर निर्माण
6. वेबसाइट डिजाइनिंग तथा निर्माण
7. सांख्यिकी गणना
पर्सनल कम्प्यूटर का मुख्य भाग
माइक्रोप्रोसेसर वह चीप होती जीस पर कंट्रोल यूनिट और ए. एल. यू. एक परिपथ होता है। माइक्रोप्रोसेसर चिप तथा अन्य डिवाइस एक इकाई में लगे रहते है, जिसे सिस्टम यूनिट कहते है। पी,सी. में एक सिस्टम यूनिट, एक मनिटर या स्क्रीन एक की बोर्ड एक माउस और अन्य आवश्यक डिवाइसेज, जैसे प्रिंटर, मॉडेम, स्पीकर, स्कैनर, प्लॉटर , ग्राफिक टेबलेट , लाइच पेन आदि होते हैं।
पर्सनल कम्प्यूटर का मूल सिद्धान्त 
पी.सी एक प्रणाली है जिसमें डाटा और निर्देशों को इनपुट डिवाइस के माध्यम से स्वीकार किया जाता है। इस इनपुट किये गये डाटा व निर्देशों को आगे सिस्टम यूनिट में पहुँचाया जाता है, जहाँ निर्देशों के अनुसार सी. पी. यू. डाटा पर क्रिया या प्रोसेसिंग का कार्य करता है और परिचय को आउटपुट यूनिट मॉनीटर या स्क्रीन पर भेज देता है। यह प्राप्त परिणाम आउटपुट कहलाता है। पी. सी में इनपुट यूनिट में प्रायः की-बोर्ड और माउस काम आते है जबकि आउटपुट यूनिट के रूप में मॉनिटर और प्रिटर काम आते हैं।

HARDWARE AND SOFTWARE

अव्यावहारिक तौर पर अगर कंप्यूटर को परिभाषित किया जाये तो हम हार्डवेयर को मनुष्य का शरीर और सॉफ्टवेर को उसकी आत्मा कह सकते हैं. हार्डवेयर कंप्यूटर के हिस्सों को कहते हैं, जिन्हें हम अपनी आँखों से देख सकते हैं, छू सकते हैं अथवा औजारों से उनपर कार्य कर सकते हैं! ये वास्तविक पदार्थ है! इसके विपरीत सॉफ्टवेयर कोई पदार्थ नहीं है! ये वे सूचनाएं, आदेश अथवा तरीके हैं जिनके आधार पर कंप्यूटर का हार्डवेयर कार्य करता है! कंप्यूटर हार्डवेयर सॉफ्टवेयर से परिचित होते हैं अथवा सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के हार्वेयर से परिचित एवं उनपर आधारित होते हैं!
 हार्डवेयर का निर्माण कारखानों में होता है, जबकि सॉफ्टवेयर कंप्यूटर ज्ञाता के मस्तिष्क की सोच द्वारा बनाएं जाते हैं, जिनके आधार पर कल -कारखाने हार्डवेयर को उत्पादित करते हैं! सामन्य भाषा में कहा जाए तो सॉफ्टवेयर कंप्यूटर द्वारा स्वीकृत विनिर्देश होते हैं जिनके माध्यम से कंप्यूटर कार्य करते हैं! कंप्यूटर हार्डवेयरों के निर्माण में उच्च टेक्नोलोजी का इस्तेमाल किया जता है! इनका निर्माण कल -कारखानों में ही मशीनों व उपकरणों की सहायता से होता है! सॉफ्टवेयर कंप्यूटर सिद्धांतो के आधार पर हार्डवेयर के लिए आवश्यक निर्देश होते हैं, इन्हें तैयार करने के लिए किसी कारखाने की आवश्यकता नहीं होती! कोई भी व्यक्ति जो कंप्यूटर के मूल सिद्धांतो एवं कार्य प्रणाली से परिचित हो अपने मस्तिष्क के उपयोग से सॉफ्टवेयर तैयार कर सकता है

उच्चस्तरीय भाषा प्रोग्राम –> कम्पाइलर –> मशीनी भाषा प्रोग्राम

कम्पाइलर
कम्पाइलर किसी कम्प्यूटर के सिस्टम साफ्टवेयर का भाग होता है । कम्पाइलर एक ऐसा  प्रोग्राम है, जो किसी उच्चस्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम का अनुवाद किसी कम्प्यूटर की मशीनी भाषा में कर देता है । निम्न चित्र में इस कार्य को दिखाया गया है ।
उच्चस्तरीय भाषा प्रोग्राम –> कम्पाइलर –> मशीनी भाषा प्रोग्राम
हर प्रोग्रामिंग भाषा के लिए अलग-अलग कम्पाइलर होता है पहले वह हमारे प्रोग्राम के हर कथन या आदेश की जांच करता है कि वह उस प्रोग्रामिंग भाषा के व्याकरण के अनुसार सही है या नहीं ।यदि प्रोग्राम में व्याकरण की कोई गलती नहीं होती, तो कम्पाइलर के काम का दूसरा भाग शुरू होता है ।यदि कोई गलती पाई जाती है, तो वह बता देता है कि किस कथन में क्या गलती है । यदि प्रोग्राम में कोई बड़ी गलती पाई जाती है, तो कम्पाइलर वहीं रूक जाता है । तब हम प्रोग्राम की गलतियाँ ठीक करके उसे फिर से कम्पाइलर को देते हैं ।
इन्टरप्रिटर 
इन्टरपेटर भी कम्पाइलर की भांति कार्य करता है । अन्तर यह है कि कम्पाइलर पूरे प्रोग्राम को एक साथ मशीनी भाषा में बदल देता है और इन्टरपेटर प्रोग्राम की एक-एक लाइन को मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है । प्रोग्राम लिखने से पहले ही इन्टरपेटर को स्मृति में लोड कर दिया जाता है ।
कम्पाइलर और इन्टरप्रिटर में अन्तर
इन्टरपेटर उच्च स्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम की प्रत्येक लाइन के कम्प्यूटर में प्रविष्ट होते ही उसे मशीनी भाषा में परिवर्तित कर लेता है, जबकि कम्पाइलर पूरे प्रोग्राम के प्रविष्ट होने के पश्चात उसे मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है ।